किताबत यानी कैलीग्राफी एक खत्म होता हुनर है. मोहम्मद ग़ालिब इसकी आखिरी पीढ़ी के नुमाइंदे माने जा सकते हैं. पुरानी दिल्ली के उर्दू बाजार में किताबों की दुकान में पालथी लगाकर काम करते ग़ालिब की बातों में अकेले रह जाने का दर्द झलकता है. वे कहते हैं, 'पहले कई साथी मिलकर काम करते थे. अब मैं बाकी रहा. नई पीढ़ी इतनी जल्दबाज है कि ये हुनर सीखते सांसें थमती हैं.'from Latest News कल्चर News18 हिंदी https://ift.tt/2xtsNXX
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