इस प्रसंग से सीख सकते हैं कि इस संसार में वहीं सुखी है जो निन्यानवे के फेर से आजाद है, यानी जो जीवन आज में जीता है. कल आने वाली कठिनाइयों के बारे में सोचकर चिंता नहीं करता.from Latest News कल्चर News18 हिंदी https://ift.tt/2MjxgzK
इस प्रसंग से सीख सकते हैं कि इस संसार में वहीं सुखी है जो निन्यानवे के फेर से आजाद है, यानी जो जीवन आज में जीता है. कल आने वाली कठिनाइयों के बारे में सोचकर चिंता नहीं करता.
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मराठी संगीत और खासकर लावणी गायकी की बात हो और सुलोचना चव्हाण का नाम न आए, ऐसा हो ही नहीं सकता. अपनी दमदार आवाज और खास अंदाज से उन्होंने लावण...
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