काजी नजरुल इस्लाम को अपने बागी तेवरों के चलते विद्रोही कवि का खिताब मिला. वे कविताओं के अलावा निजी जिंदगी में भी धर्म के ठेकेदारों से बैर लेते रहे.from Latest News कल्चर News18 हिंदी https://ift.tt/2og2Gfk
काजी नजरुल इस्लाम को अपने बागी तेवरों के चलते विद्रोही कवि का खिताब मिला. वे कविताओं के अलावा निजी जिंदगी में भी धर्म के ठेकेदारों से बैर लेते रहे.
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हिंदी सिनेमा में मकर संक्रांति और पतंगबाजी पर आधारित गाने जैसे 'उड़ी उड़ी जाए', 'ढील दे', 'मांझा', 'रुत आ गई रे...
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