यूं तो गुलज़ार की कलम से निकले अनगिनत शब्द कहीं न कहीं किसी न किसी किताब में पनाह ले चुके हैं लेकिन उनकी लिखी नज़्में अगर उन्हीं की आवाज़ में सुनने का मौका अगर मिले तो कोई भला क्यों छोड़े?from Latest News मनोरंजन News18 हिंदी https://ift.tt/2o2tmQG
यूं तो गुलज़ार की कलम से निकले अनगिनत शब्द कहीं न कहीं किसी न किसी किताब में पनाह ले चुके हैं लेकिन उनकी लिखी नज़्में अगर उन्हीं की आवाज़ में सुनने का मौका अगर मिले तो कोई भला क्यों छोड़े?
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मराठी संगीत और खासकर लावणी गायकी की बात हो और सुलोचना चव्हाण का नाम न आए, ऐसा हो ही नहीं सकता. अपनी दमदार आवाज और खास अंदाज से उन्होंने लावण...
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